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Bihar Police News: बिहार में पुलिस व्यवस्था का होगा पुनर्गठन, 3 जिलों को मिलेंगे सिटी SP और EOU में 143 नए पद

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में पुलिस प्रशासन का बड़ा पुनर्गठन होने जा रहा है। मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में सिटी SP कार्यालय बनेंगे, EOU में 143 पद बढ़ेंगे और फॉरेंसिक विंग सीधे गृह विभाग के अधीन होगा।

7 नवंबर 2026 | Alam Ki Khabar


बिहार में पुलिस प्रशासन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी है। राज्य सरकार ने पुलिस के अलग-अलग विभागों में नए पदों के सृजन, क्षेत्रीय कार्यालयों के पुनर्गठन और फॉरेंसिक व्यवस्था को पुलिस से अलग करने का फैसला किया है। इस बदलाव के तहत मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में अलग नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी SP) की व्यवस्था होगी, जबकि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में 143 नए पद स्वीकृत किए गए हैं।


गृह विभाग की अधिसूचना के बाद इस प्रशासनिक पुनर्गठन को लागू करने का रास्ता साफ हुआ है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इन बदलावों पर हर साल करीब 17.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसका मकसद शहरी पुलिसिंग, आर्थिक अपराधों की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने वाली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।


मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में बनेंगे सिटी SP कार्यालय


पुलिस व्यवस्था में सबसे प्रमुख बदलाव तीन जिलों में अलग सिटी SP की तैनाती है। मोतिहारी, पूर्णिया और सारण के लिए पे-लेवल 13 के नगर पुलिस अधीक्षक के पद स्वीकृत किए गए हैं। इनके साथ तीन आशु एएसआई और छह एएसआई के पद भी बनाए जाएंगे।


तीनों जिलों में इस व्यवस्था के लिए कुल 12 पदों को मंजूरी मिली है। इस पर सालाना लगभग 1.41 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अलग सिटी SP मिलने से शहरी क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, गश्ती, यातायात प्रबंधन और संवेदनशील मामलों की निगरानी के लिए विशेष जिम्मेदारी तय हो सकेगी।


EOU को मिलेगी 143 नए पदों की ताकत


आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की जांच करने वाली EOU का भी विस्तार किया जा रहा है। इस इकाई में कुल 143 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक डीआईजी, एक एसपी, 12 डीएसपी और 33 पुलिस निरीक्षक के पद शामिल हैं।


इसके अलावा 24 एएसआई, 12 स्टेनो एएसआई, 12 हवलदार, 24 चालक सिपाही और 24 कंप्यूटर ऑपरेटर सिपाही के पद भी बनाए जाएंगे। इस विस्तार पर सालाना 12.14 करोड़ रुपये खर्च होंगे।


अतिरिक्त अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों से वित्तीय धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग और दूसरी आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच में मदद मिलने की उम्मीद है।


फॉरेंसिक विंग को पुलिस नियंत्रण से किया जाएगा अलग


पुनर्गठन का एक अहम हिस्सा वैज्ञानिक जांच व्यवस्था से जुड़ा है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला, फिंगरप्रिंट ब्यूरो और फोटो ब्यूरो को पुलिस नियंत्रण से अलग कर सीधे गृह विभाग के अधीन लाने का प्रावधान किया गया है।


इस व्यवस्था के प्रशासनिक और तकनीकी संचालन के लिए पे-लेवल 14 में निदेशक प्रमुख का एक स्थायी पद भी स्वीकृत किया गया है। इस पद पर सालाना करीब 35 लाख रुपये खर्च होंगे।


फॉरेंसिक सेवाओं को अलग प्रशासनिक ढांचे में लाने का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और स्वतंत्र बनाना है। आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्य की अहमियत को देखते हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


भागलपुर और बेगूसराय में भी होगा प्रशासनिक बदलाव


भागलपुर में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभालने के लिए दो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) की तैनाती का प्रावधान किया गया है।


वहीं, चार पुलिस प्रक्षेत्रों के पुनर्गठन के तहत बेगूसराय में डीआईजी कार्यालय की व्यवस्था की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था के लिए 20 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें चार डीआईजी, चार एसपी (स्टाफ ऑफिसर) और चार अवर सचिव के पद शामिल हैं।


बेगूसराय स्थित कार्यालय के लिए आठ लिपिकीय पद भी स्वीकृत किए गए हैं। इसके साथ चार वरीय डीएसपी पदों को स्थानांतरित करने का प्रावधान है। इस हिस्से पर सालाना करीब 3.46 करोड़ रुपये खर्च होंगे।


किस मद में कितना होगा सालाना खर्च?


सरकार की ओर से स्वीकृत पुनर्गठन के तहत अलग-अलग मदों में खर्च का अनुमान इस प्रकार है:


- EOU के 143 नए पदों पर 12.14 करोड़ रुपये।

- तीन सिटी SP कार्यालयों के 12 पदों पर 1.41 करोड़ रुपये।

- चार प्रक्षेत्रों के पुनर्गठन और बेगूसराय कार्यालय पर 3.46 करोड़ रुपये।

- फॉरेंसिक निदेशालय के निदेशक प्रमुख पद पर करीब 35 लाख रुपये।


इन सभी मदों को मिलाकर सालाना अतिरिक्त वित्तीय भार लगभग 17.50 करोड़ रुपये होगा।


नियुक्तियों और कामकाज पर टिकी रहेगी फैसले की सफलता


बिहार पुलिस के इस पुनर्गठन से शहरी क्षेत्रों में पुलिसिंग मजबूत करने, आर्थिक अपराधों की जांच में संसाधन बढ़ाने और फॉरेंसिक व्यवस्था को अलग प्रशासनिक पहचान देने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर नए पदों पर नियुक्तियां होने और नई व्यवस्था के प्रभावी ढंग से लागू होने के बाद ही सामने आएगा।


अब निगाह इस बात पर रहेगी कि स्वीकृत पदों पर तैनाती कब तक होती है और प्रशासनिक बदलाव का लाभ आम लोगों को कानून-व्यवस्था तथा जांच प्रक्रिया में कितना मिलता है।

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